प्राकृतिक खेती में कौन-कौन से उत्पाद इस्तेमाल होते हैं?
- भारतीय किसानों के लिए पूरी सूची
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आपने अपनी ऑर्गेनिक खेती शुरू करने का फैसला कर लिया है? बहुत बढ़िया। अब
सबसे पहले मन में यही सवाल आएंगे: आखिर यह खेती क्या है, शुरुआत कैसे करें, खेत में क्या इनपुट
डालें और क्या उम्मीद रखें? चिंता मत कीजिए, आप बिल्कुल सही जगह पर हैं।
इस गाइड में इनपुट को तीन हिस्सों में समझाया गया है: पोषण,मिट्टी सुधार और कीट-रोग प्रबंधन। साथ
ही, यह भी बताया गया है कि रासायनिक इनपुट से प्राकृतिक खेती की ओर बदलाव कैसे धीरे-धीरे किया
जाए।
1. प्राकृतिक खेती क्यों अपनाएं?
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना सिर्फ धरती के लिए बेहतर होने की बात नहीं है, यह आपके लिए भी बेहतर
हो सकता है। जब
खेती में रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम होती है, तो आप अपनी मिट्टी को बेहतर तरीके से समझने लगते हैं, खेत पर
उपलब्ध चीज़ों का इस्तेमाल कर सकते हैं और जो उपज आपकी थाली तक पहुंचती है, उसके बारे में ज्यादा भरोसा रख सकते
हैं।
इसीलिए प्राकृतिक खेती में इस्तेमाल होने वाले रसायन मुक्त खाद और दूसरे जैविक इनपुट को समझना
जरूरी है। कुछ आप
खुद तैयार कर सकते हैं, कुछ बाजार से ले सकते हैं। आखिर में बात यही है कि आपके खेत को क्या चाहिए, और उसे
देने का
सबसे सही तरीका क्या है।
2. पोषण: पहले समझें कि मिट्टी को क्या चाहिए.
मिट्टी और फसल को देखें, क्यूंकि खेत को देखकर समस्या का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। यदि आपके खेत में:
● मिट्टी बहुत सूखी है:नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग और जैविक पदार्थ का इस्तेमाल करें।
● मिट्टी में पानी जमा रहता है:जल निकासी के लिए नालियाँ बनाएं और जरूरत के अनुसार ही पानी दें।
स्वस्थ मिट्टी के लक्षण
मिट्टी भुरभुरी हो, पानी को सोखकर कुछ समय तक नमी बनाए रखे और उसमें जड़ों को बढ़ने की जगह हो। मिट्टी में केंचुए
और दूसरे छोटे जीव दिखना भी अच्छी जैविक गतिविधि का संकेत हो सकता है।
3. मुख्य पोषक तत्वों की समझ
एक फसल को अच्छे से उगने के लिए सिर्फ पानी की ज़रूरत नहीं पड़ती. जिस ज़मीन में वोह उगती ही,उसकी देखभाल करना बहुतु
ज़रूरी है और तो और उस मिट्टी से मिलने वाले पोषक तत्व भी उतने ही जरूरी हैं। आइए,3 मुख्य पोषक तत्वों को समझते
हैं:
● नाइट्रोजन (N): पत्तियों और पौधे की बढ़त के लिए।
● फॉस्फोरस (P): जड़ों और फूल आने के लिए।
● पोटैशियम (K): पौधे की मजबूती और समग्र विकास के लिए।
4. जरूरत के हिसाब से इनपुट चुनें.
अब जब आपको पता है कि मिट्टी और फसल को क्या चाहिए, उसी हिसाब से इनपुट चुनें।
● नाइट्रोजन की जरूरत है तो चुनें कम्पोस्ट,गोबर की खाद या हरी खाद जैसे विकल्प देखें।
● फॉस्फोरस की जरूरत है तो चुनें जैविक स्रोतों से मिलने वाले फॉस्फोरस वाले इनपुट चुनें।
● पोटैशियम की जरूरत है तो चुनें उपलब्ध जैविक स्रोतों से पोटैशियम देने वाले इनपुट चुनें।
5. मिट्टी सुधार
कब मिट्टी सुधारने की ज़रूरत है? जैसे की हमने बताया, मिटटी में पानी डालना काफी नहीं, मिटटी की ज़रूरतों को परखना
बहुत ज़रुरुई है। अगर:
● मिट्टी सख्त और कड़ी है: जैविक पदार्थ की कमी या मिट्टी के खराब ढाँचे की ओर ध्यान दें।
● मिट्टी पानी नहीं रोकती: कम्पोस्ट, गोबर की खाद और मल्च जैसे जैविक पदार्थ मदद कर सकते
हैं।
● मिट्टी में पानी जमा रहता है: जल निकासी सुधारें और जरूरत के अनुसार ही पानी दें।
● मिट्टी में जैविक पदार्थ कम है: फसल अवशेष, कम्पोस्ट, हरी खाद, या गोबर की खाद वापस मिट्टी में
मिलाएं।
कैसे नतीजे की उम्मीद करें?
ध्यान रखिये की यह बदलाव तुरंत नहीं दिखता, इसलिए नियमित देखभाल और समय दोनों ज़रूरी हैं। मिट्टी में जैविक पदार्थ
बढ़ने के साथ मिट्टी की संरचना,नमी बनाए रखने की क्षमता और जड़ों का वातावरण बेहतर हो सकता है।
6. कीट और रोग प्रबंधन
फसल में कीट या रोग दिखते ही पहला ख्याल अक्सर स्प्रे का आता है। लेकिन प्राकृतिक खेती में पहले यह समझना ज़रूरी
है कि समस्या क्या है और कितनी है। इसके बाद ही तय करें कि घर पर तैयार किया हुआ उपाय काम आएगा या बाज़ार से
इनपुट लेना बेहतर होगा।
ध्यान रखें: कीट की पहचान किए बिना कोई भी घोल या उत्पाद इस्तेमाल न करें। समस्या के हिसाब से
ही उपाय चुनें।
- आम कीटों को पहचानें
● एफिड्स (माहू): पत्तियों और कोमल तनों पर छोटे कीट दिखाई दें, तो प्रभावित हिस्सों पर पानी की
तेज धार से उन्हें
हटाएं और नीम आधारित घोल का इस्तेमाल कर सकते हैं।
● सफेद मक्खी: पत्तियों के नीचे छोटे सफेद कीट दिखाई दें, तो प्रभावित पत्तियों की निगरानी करें
और पीले चिपचिपे
ट्रैप लगाएं।
● थ्रिप्स: पत्तियों पर सफेद या चांदी जैसी धारियाँ और मुड़ती हुई पत्तियाँ दिखें, तो प्रभावित
हिस्सों की निगरानी
करें और जरूरत के अनुसार नीम आधारित उपाय अपनाएं।
● फल छेदक या तना छेदक: फल या तने में छेद दिखाई दें, तो प्रभावित फल या पौधे के हिस्से को हटाकर
नष्ट करें और खेत
में निगरानी बढ़ाएं।
- देखें: समस्या कितनी फैली है
● कुछ ही पौधे प्रभावित हैं: पहले प्रभावित हिस्से को काटें और हटाएं, फिर पौधे पर निगरानी
रखें।
● बड़े हिस्से में कीट या रोग फैल गया है: प्रभावित हिस्सों को हटाने के साथ ट्राइकोडर्मा या
स्यूडोमोनास जैसे
उपयुक्त जैव-नियंत्रण उत्पाद इस्तेमाल करें
7. एक नज़र में: कौन-सा इनपुट कब इस्तेमाल करें:
| श्रेणी | प्राकृतिक इनपुट | बाज़ार से मिलने वाले इनपुट |
|---|---|---|
| कब इस्तेमाल करें? | जब समस्या शुरुआती हो, सीमित क्षेत्र में हो और आपके पास जरूरी सामग्री और समय हो। | जब समस्या बड़े क्षेत्र में फैल गई हो, या इनपुट तैयार करने के लिए पर्याप्त समय या सामग्री उपलब्ध न हो। |
| क्या इस्तेमाल करें? |
जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, कम्पोस्ट, गोबर की खाद |
नीम आधारित जैविक कीटनाशक, ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास आधारित जैव-नियंत्रण उत्पाद |
8. रोग प्रबंधन
रोग पौधे की सेहत, बढ़त और लंबे समय तक टिके रहने को प्रभावित कर सकते हैं। सही समय पर पहचान और देखभाल से इन्हें फैलने से रोका जा सकता है। इसलिए, फसल में दिखने वाले कुछ आम रोगों और उन्हें संभालने के तरीकों पर नज़र रखें।
| रोग | कैसे पहचानें? | क्या करें? |
|---|---|---|
| पाउडरी मिल्ड्यू | पत्तियों पर सफेद, पाउडर जैसी परत | प्रभावित पत्तियों को हटाएं और हवा का आवागमन बेहतर रखें। |
| डाउनी मिल्ड्यू | पत्तियों पर पीले धब्बे और नीचे की तरफ फफूंद जैसी परत | ज्यादा नमी से बचाएं और प्रभावित हिस्सों को हटाएं। |
| रूट रॉट | जड़ें भूरी या सड़ी हुई और पौधा मुरझाने लगता है | पानी का जमाव रोकें और जल निकासी सुधारें। |
| लीफ स्पॉट | पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे | संक्रमित पत्तियां हटाएं और रोग के अनुसार उपचार चुनें। |
9.घर पर तैयार होने वाले प्राकृतिक इनपुट
प्राकृतिक खेती की शुरुआत का मतलब यह नहीं कि आपको हर चीज़ बाज़ार से खरीदनी पड़े। इससे लागत और बाहर से इनपुट
खरीदने की जरूरत कम हो सकती है।
ध्यान रखें: इनपुट का असर बनाए रखने के लिए उनका नियमित और सही मात्रा में इस्तेमाल ज़रूरी है,
वरना पोषण में कमी रह सकती है।
शुरुआत के लिए तीन आम DIY विकल्प हैं:
1. जीवामृत
गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन या दाल के आटे और पानी से जीवामृत तैयार किया जाता है। इसे किण्वित होने के बाद खेत में
इस्तेमाल किया जाता है।
2. घनजीवामृत
जीवामृत को ठोस रूप में तैयार करने के लिए इसे गोबर और दूसरी सूखी सामग्री के साथ मिलाकर छाया में सुखाया जाता है।
सूखने के बाद इसे खेत में इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. बीजामृत
गोबर, गोमूत्र, चूना, मिट्टी और पानी से बीजामृत तैयार किया जाता है। बुवाई से पहले बीजों को इसमें उपचारित करके
सुखाया जाता है।
10. रासायनिक इनपुट
अगर आप अभी रासायनिक इनपुट इस्तेमाल कर रहे हैं, या आगे भी उनका इस्तेमाल करने की योजना है, तो ध्यान रखिये की आप
उनका इस्तेमाल एकदम से बंद न करें। क्योंकि फसल पहले से उसी पोषण और सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर हो सकती है, इसलिए
इन्हें अचानक बंद करने से फसल पर तनाव पड़ता है।
प्राकृतिक इनपुट की ओर बदलाव धीरे-धीरे करें, ताकि फसल की पोषण और सुरक्षा की जरूरतों में अचानक बदलाव न आए।
शुरुआत करें, धीरे-धीरे आगे बढ़ें
प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने के लिए आपको सब कुछ एक साथ बदलने की जरूरत नहीं है। पहले मिट्टी और फसल की जरूरत समझें,
फिर सही इनपुट चुनें और धीरे-धीरे बदलाव लाएं।
सबसे जरूरी है कि आप नियमित रहें, फसल को ध्यान से देखें और बदलाव को समय दें। सही जानकारी और थोड़े धैर्य के साथ
शुरुआत करना आसान हो जाता है।
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